जब अकबर ने तुलसीदास को कारागार में बंदी बनाया

एक बार बाबा तुलसीदास सुबह गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। उसी समय एक स्त्री जिसके पति की मृत्यु हो गई थी उसे सजा धजा कर गांव वाले सती करने ले जा रहे थे। 

सती होने से पहले स्त्री को सभी का आशिर्वाद लेना पड़ता था। रास्ते में तुलसीदास जी भी दिख गये तब वह स्त्री उनके पांव छूने के लिए नीचे झुकी। तुलसीदास जी ने आशिर्वाद देते हुए कहा- अखंड सौभाग्यवती भव !

उस स्त्री के साथ चलने वाले लोगों ने कहा बाबा इसके पति की तो मौत हो चुकी है और अब आप इसके पति को जीवित करके अपने वचन को सत्य साबित करो।

तुलसीदास ने बहुत मना किया लेकिन वे नहीं माने फिर तुलसीदास ने कहा ठीक है मुझे मृत शरीर के पास ले चलो और सभी अपनी आंखें बंद रखेंगे। 

बाबा तुलसीदास ने राम जी से प्रार्थना की और वह मृत व्यक्ति राम राम बोलकर उठ गया, एक व्यक्ति ने आंखें खोल दीं थीं वह अंधा हो गया।

इस तरह तुलसीदास की ख्याती बादशाह अकबर के दरबार तक पहुंच गई। उन्होंने तुलसीदास को दिल्ली बुलाया। राजा टोडरमल तुलसीदास के नजदीकी थे उन्होंने ही अकबर को तुलसी के चमत्कार के बारे में बताया था।

बादशाह अकबर ने तुलसीदास से करामात दिखाने को कहा। लेकिन तुलसी दास ने कहा कि वे कोई जादूगर नहीं हैं जो चमत्कार करके लोगों का मनोरंजन करेंगे। इस बात पर अकबर नाराज होकर उन्हें कारागार में बंद कर देता है।

कारागार में तुलसी दास ने हनुमान जी का स्तवन किया। इतिहासकार कहते हैं कि कुछ दिनों में अकबर के राजधानी में लाखों बंदर पहुंच गए। 

वे बंदर अकबर के महल, रनिवास, बगीचे में घुसकर उत्पात मचाने लगे। अकबर और उसकी प्रजा इन सबसे परेशान हो गयी तब अकबर के काजी ने कहा जिस संत को आपने बंदी बनाया है उसे रिहा करें।

तब बादशाह अकबर ने तुलसीदास जी को रिहा करते हुए उनसे माफी मांगी और सीता राम के तस्वीर वाली मुद्रा भी चलाई।

Manish Mundra
Manish Mundra
Articles: 91

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *