कामदेव और रति

एक बार तारकासुर नामक असुर ने स्वर्ग लोक पर कब्जा कर लिया। उसके अत्याचार से तीनों लोक में त्राहि-त्राहि मच गई। देवताओं को मालूम चला कि तारकासुर का अंत शिवजी के हाथों से ही हो सकता है पर उस समय वे ध्यान मग्न थे।

ध्यानरत शिवजी को जगाने का किसी में भी साहस नहीं था। तब देवताओं ने इस कार्य में कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने अपनी पत्नी रति के साथ भगवान शिव का ध्यान भंग कर दिया। इससे क्रोधित शिवजी ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव का भस्म कर दिया। अपने पति कामदेव का यह हश्र देखकर रति रोते हुए शिवजी से गुहार लगाने लगीं। इस पर भगवान शिव पिघले और कामदेव को पुनः जीवित करने का वरदान दिया।

उन्होंने रति से कहा वे अभी अनंग हैं, अर्थात बिना शरीर के हैं। द्वापर युग में वे दोबारा सशरीर होकर भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे । शिवजी ने रति से यह भी कहा कि सृष्टि चक्र चलाने के लिए कामदेव और तुम मनुष्य के हृदय में प्रवेश करके काम और प्रेम बढ़ाने का काम करते रहो। उन्होंने यह आशीर्वाद भी दिया कि अनंग त्रयोदशी के दिन शिव-पार्वती के साथ कामदेव और रति की पूजा करने वालों के प्रेम संबंध सफल होंगे।

कामदेव के धनुष और बाण

उनका धनुष मिठास से भरे गन्ने का बना होता है जिसमें मधुमक्खियों के शहद की रस्सी लगी है। उनके धनुष का बाण अशोक के पेड़ के महकते फूलों के अलावा सफेद, नीले कमल, चमेली और आम के पेड़ पर लगने वाले फूलों से बने होते हैं।

कामदेव के पास मुख्यत: 5 प्रकार के बाण हैं।

कामदेव के 5 बाणों के नाम : 1. मारण, 2. स्तम्भन, 3. जृम्भन, 4. शोषण, 5. उम्मादन (मन्मन्थ)।

यहां रहता है कामदेव का वास

यौवनं स्त्री च पुष्पाणि सुवासानि महामते:। गानं मधुरश्चैव मृदुलाण्डजशब्दक:।।

उद्यानानि वसन्तश्च सुवासाश्चन्दनादय:। सङ्गो विषयसक्तानां नराणां गुह्यदर्शनम्।।

वायुर्मद: सुवासश्र्च वस्त्राण्यपि नवानि वै। भूषणादिकमेवं ते देहा नाना कृता मया।।

मुद्गल पुराण के अनुसार कामदेव का वास यौवन, स्त्री, सुंदर फूल, गीत, पराग कण या फूलों का रस, पक्षियों की मीठी आवाज, सुंदर बाग-बगीचों, वसंत ऋ‍तु, चंदन, काम-वासनाओं में लिप्त मनुष्य की संगति, छुपे अंग, सुहानी और मंद हवा, रहने के सुंदर स्थान, आकर्षक वस्त्र और सुंदर आभूषण धारण किए शरीरों में रहता है। इसके अलावा कामदेव स्त्रियों के शरीर में भी वास करते हैं, खासतौर पर स्त्रियों के नयन, ललाट, भौंह और होठों पर इनका प्रभाव काफी रहता है।

श्रीकृष्ण और कामदेव

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को भी कामदेव ने अपने नियंत्रण में लाने का प्रयास किया था। कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से यह शर्त लगाई कि वे उन्हें भी स्वर्ग की अप्सराओं से भी सुंदर गोपियों के प्रति आसक्त कर देंगे। श्रीकृष्ण ने कामदेव की सभी शर्त स्वीकार की और गोपियों संग रास भी रचाया लेकिन फिर भी उनके मन के भीतर एक भी क्षण के लिए वासना ने घर नहीं किया।

रति ने पाला कामदेव को पुत्र की तरह फिर उनसे कर लिया विवाह 

जब शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया तब ये देख रति विलाप करने लगी तब जाकर शिव ने कामदेव के पुनः कृष्ण के पुत्र रूप में धरती पर जन्म लेने की बात बताई। शिव के कहे अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि को प्रद्युम्न नाम का पुत्र हुआ, जो कि कामदेव का ही अवतार था।

प्राचीन किंवदंतियों के अनुसार बताते हैं कि श्रीकृष्ण से दुश्मनी के चलते राक्षस शंभरासुर नवराज प्रद्युम्न का अपहरण करके ले गया और उसे समुद्र में फेंक आया। उस शिशु को एक मछली ने निगल लिया और वो मछली मछुआरों द्वारा पकड़ी जाने के बाद शंभरासुर के रसोई घर में ही पहुंच गई, तब रति रसोई में काम करने वाली मायावती नाम की एक स्त्री का रूप धारण करके रसोईघर में पहुंच गई। वहां आई मछली को उसने ही काटा और उसमें से निकले बच्चे को मां के समान पाला-पोसा। जब वो बच्चा युवा हुआ तो उसे पूर्व जन्म की सारी याद दिलाई गई। इतना ही नहीं, सारी कलाएं भी सिखाईं तब प्रद्युम्न ने शंभरासुर का वध किया और फिर मायावती को ही अपनी पत्नी रूप में द्वारका ले आए।

 

Manish Mundra
Manish Mundra
Articles: 91

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *