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ब्रह्मलोक में ट्रेंड कर रहा
राम, हनुमान और केले का पत्ता
जब रावण की सेना को हरा कर और सीता जी को लेकर श्री राम...
सृष्टि-तत्त्व और शरीर-संरचना
सृष्टि–तत्त्व और शरीर–संरचना मूल प्रकृति सबसे पहले बुद्धि, फिर अहङ्कार, फिर ५ तन्मात्राओं (सूक्ष्मभूतों),...
आरती: ॐ जय जगदीश हरे!
दुनियाँ में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा...
श्री हनुमान चालीसा
श्री हनुमान चालीसा का एक-एक शब्द इतना प्रभावशाली है कि अगर पूरे मनोयोग से...
“रामायण” क्या है??
“रामायण” क्या है?? अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना……. रामायण...
मनोबल और आत्मविश्वास
एक नर्स लंदन में ऑपरेशन से दो घंटे पहले मरीज़ के कमरे में घुसकर...
वर्तमान में चलन
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16 कलाओं का रहस्यमयी ज्ञान
16 कलाओं का रहस्यमयी ज्ञान, *अध्यात्मिक कलाएं* अध्यात्मिक कलाएं मुख्यत: 16 हैं। उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्वरतुल्य होता है या कहें कि.
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आदि शंकराचार्य की योग तरावली
आदि शंकराचार्य की योग तरावली योग के संदेश पर सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंधों में से एक है। योग तरावली में 29 श्लोक हैं जो बंध और.
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गीता में वर्णित हैं १८ योग
गीता में योग की १८ अवधारणा के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान प्रदान किया था। इन योग का वर्णन कर के ही.
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नवरात्री के उत्सव का महत्त्व
नवरात्रि का उत्सव पूरी तरह से देवी आराधना या शक्ति की पूजा से जुड़ा है। नवरात्रि के नौ दिनों को मूल रूप से तीन गुणों.
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योग का मार्ग
योग का मार्ग अधिकांश योग साधक जानते हैं कि योग शब्द का अर्थ होता है जोड़ना या मिलाना, जिसे अंग्रेजी में “यूनियन” भी कहा जाता.
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’नवरात्री’ शक्ति के नवरूपों की उपासना
’नवरात्री’ शक्ति के नवरूपों की उपासना भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और.
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तुलसीदास जी का श्री राम से मिलन
काशी में एक जगह पर तुलसीदास रोज रामचरित मानस का पाठ करते थे । उनकी कथा को बहुत सारे भक्त सुनने आते थे। तुलसीदास जी रोज.
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सात चक्र और सात तरह के लोग
वैसे तो ‘चक्र' का मतलब पहिया या गोलाकार होता है। चूंकि इसका संबंध शरीर में एक आयाम से दूसरे आयाम की ओर गति से है.
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कर्मयोग मनोनिग्रह
1) काम- जो नर्क का द्वार कहलाता हैं और मनुष्य का चमड़ी के आकर्षक का दास बनाकर उसकी बुद्धि, पवित्रता और शारीरिक शक्ति हर लेता.
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कामदेव और रति
एक बार तारकासुर नामक असुर ने स्वर्ग लोक पर कब्जा कर लिया। उसके अत्याचार से तीनों लोक में त्राहि-त्राहि मच गई। देवताओं को मालूम चला.
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राम गीता
रामचरितमानस’ के ‘अरण्यकाण्ड’ में, लक्ष्मण जी ने, श्री राम से विनम्रतापूर्वक पांच प्रश्नं पूछे। लक्ष्माण जी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए, श्रीराम ने.
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खुशियो का रसायन
हम अक्सर खुशियों के बारे में बाते करते है पर क्या आप जानते हैं कि हम खुशी कैसे महसूस करते हैं? घनिष्ठ मित्र बनाना, पर्यटन,.
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Words of St. Francis
1. Riches prick us with a thousand troubles in getting them, as many cares in preserving them, And yet more anxiety in spending them, and with grief in losing them..
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“ध्वनि उपचार” Sound Healing
प्रत्येक सभ्यता व धर्म ने संभवतः इस बात को स्वीकार किया है की ब्रह्माण्ड या इस सृष्टि की उत्पत्ति एक कंपन या नाद से हुई.
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प्राणायाम
प्राणायामप्राणायाम का तात्पर्य प्राण + आयाम यानि वो विधि जिससे प्राणों को एक नया आयाम प्रदान किया जा सके। प्राण एक स्वतंत्र तत्व है, इसे.
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विजयदशमी "अधर्म पर धर्म की जीत"
विजयदशमी या दशहरा नवरात्रि का 10 वां दिन है और हिन्दुओ के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह अन्याय पर न्याय की, बुराई पर.
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ऐसी कृपा करो श्री राधे
ऐसी कृपा करो श्री राधे दीजियो वृन्दावन को वास, वृन्दावन को वास, दीजियो हरि भगतन को तार...., भूख लगे तो मांगन जाऊ, ब्रिजवासिन के टुकड़े.
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श्री राधे रानी दे डारो नी बंसी हमारी,
श्री राधे रानी दे डारो नी बंसी मोरी अब राधे रानी दे डारो बंसी मोरी काहे से गाऊँ राधे काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊं.
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“रामायण” क्या है??
“रामायण” क्या है?? अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना....... रामायण का एक छोटा सा वृतांत है, उसी से शायद कुछ समझा.
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गोविन्द दामोदर स्तोत्रम
करार विन्दे न पदार विन्दम् , मुखार विन्दे विनिवेश यन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानम् , बालम् मुकुंदम् मनसा स्मरामि ॥ १ ॥ वट वृक्ष के.
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प्रातः स्मरण - स्तोत्रम (प्रातःकाल की प्रार्थना)
श्री आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह एक प्रार्थना है। जिसमें तीन श्लोक सम्मलित हैं। इसमें व्यक्ति के मन (मनस), भाषण (वाणी) और शरीर (काया) को.
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यक्ष और युधिष्ठिर का संवाद
यक्ष और युधिष्ठिर के बीच जो संवाद हुआ है उसे जानने के बाद आप जरूर हैरान रह जाएंगे। आप भी अपने जीवन में कुछ प्रश्नों.
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जिसको जान लेने से सब जान लिया जाता है
उपनिषद में कथा है कि एक ब्राह्मण पुत्र श्वेतकेतु गुरु से सम्पूर्ण ज्ञान लेके वापिस लोटा। तो उसके पिता ने देखा कि श्वेतकेतु वापस लौट रहा.
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सत्संग का महत्व
एक बार एक युवक पुज्य कबीर साहिब जी के पास आया और कहने लगा, गुरु महाराज! मैंने अपनी शिक्षा से पर्याप्त ज्ञान ग्रहण कर लिया.
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जब अकबर ने तुलसीदास को कारागार में बंदी बनाया
एक बार बाबा तुलसीदास सुबह गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। उसी समय एक स्त्री जिसके पति की मृत्यु हो गई थी उसे सजा.
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दत्तात्रेय और उनके २४ गुरु
परम तेजस्वी अवधूत दत्तात्रेय का दर्शन पाकर राजा यदु ने अपने को धन्य माना और विनयावनत होकर पूछा --" आपके शरीर ,वाणी और भावनाओं से.
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महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र को संकटास्तुतिः के नाम से भी जाना जाता है। यह कनकमंजरी छन्द पर आधारित है। इस स्तोत्र में शिवताण्डव की तरह शब्द.
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शिव तांडव स्तोत्र
शिव ताण्डव स्तोत्र परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण द्वारा रचित भगवान शिव का एक बहुत चमत्कारी स्तोत्र है। रावण ने शिव की स्तुति कर उन्हें प्रसन्न करने.
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कुंडलिनी शक्ति और जागरण
कुंडलिनी शक्ति और जागरण (Kundalini Shakti and Enlightenment) महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांगयोग के विभूतिपाद में अष्टसिद्धि के अलावा अन्य अनेक प्रकार की सिद्धियों का.
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योग क्या है ?
वास्तविक रूप योग का में अर्थ है “ वह जो हमें सत्य से सामना कराये, योग का अर्थ संयोजन या जोड़ना होता है, परंतु जुड़ाव.
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अष्टांग योग
अष्टांग योग महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योग का मार्ग है यह कोई मत-पन्थ या सप्रदाय नहीं, अपितु जीवन जीने की सम्पूर्ण पद्धति है। यदि संसार.
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मनोबल और आत्मविश्वास
एक नर्स लंदन में ऑपरेशन से दो घंटे पहले मरीज़ के कमरे में घुसकर कमरे में रखे गुलदस्ते को संवारने और ठीक करने लगी। ऐसे.
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कमजोर आत्मा
कमजोर आत्मा का तात्पर्य है ऐसी आत्मा, जो अपने शरीर का मालिक नहीं है बल्कि मन उस शरीर का मालिक है, इस अवस्था में विकार.
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डाँकू रत्नाकर और देवऋषि नारद
बहुत समय पहले की बात है किसी राज्य में एक बड़े ही खूंखार डाँकू का भय व्याप्त था। उस डाँकू का नाम रत्नाकर था। वह.
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राम चरण और कछुआ, केवट, सुदामा
यह कहानी है एक कछुए की |सुना है की बेचारे ने प्रभु चरणों की महिमा सुनी और उन चरणों मे जाना चाहा | तो पूछने.
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राम, हनुमान और केले का पत्ता
जब रावण की सेना को हरा कर और सीता जी को लेकर श्री राम चन्द्र जी वापस अयोध्या पहुंचे - तो वहां उन सब के.
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षट्चक्रों का स्वरूप
षट्चक्रों का स्वरूप कुण्डलिनी की शक्ति के मूल तक पहुँचने के मार्ग में छ: फाटक हैं अथवा यों कहना चाहिए कि छ: ताले लगे हुए.
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संस्कृत सुभाषितानि
संस्कृत सुभाषित के हिन्दी अर्थ हैं। सुभाषित शब्द "सु" और "भाषित" के मेल से बना है जिसका अर्थ है "सुन्दर भाषा में कहा गया"। संस्कृत.
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मनुष्य की ११ इन्द्रिया
भारतीय दर्शन की सामान्य अवधारणा के साथ गीता भी मानती है कि मनुष्य के पास 5 ज्ञानेन्द्रियां और 5 कर्मेन्द्रियां हैं। ज्ञानेन्द्रियां हैं- रूप, शब्द,.
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शरीर और आत्मा के मध्य सेतु है मन
शरीर और आत्मा के मध्य सेतु है मन “बिनु रसरी गृह खल बंधा, तासू बंधा अलेख,दीन्ह दर्पण हस्त मधे, चसम बिना का देख” प्रश्न - ‘मन’ ‘शरीर’.
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अध्यात्म क्या है ?
अध्यात्म क्या है ? अध्यात्म का अर्थ है आत्मा का अधयन्न, अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना,मनना और दर्शन करना अर्थात अपने आप के.
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रामचरितमानस से "सदाचार"के सूत्र
सब करि मांगहि एक फलु राम चरन रति होउ ।तिन के मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ ।।काम कोह मद मान न मोहा , लोभ.
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राम नाम की महिमा
ब्रह्म राम ते नाम बड,बरदायक बरदानि ।राम चरित सत कोटि मह,लिय महेश जिय जानि ।।श्री आदिकवि वाल्मीकि जी ने पृथ्वी पर सर्व प्रथम श्री राम.
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माया क्या है ?
रामचरितमानस’ के ‘अरण्यकाण्ड’ में, लक्ष्मण जी ने, श्री राम से विनम्रतापूर्वक पांच प्रश्नं पूछे। लक्ष्माण जी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए, श्रीराम ने.
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गोस्वामी तुलसीदास जी
(गोस्वामी तुलसीदास जी) तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग।सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥ अर्थ : तुलसीदास जी कहते हैं, इस संसार.
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गीता में जीवन का सार
बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि गीता में जीवन का सार है. श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध में अर्जुन को कुछ उपदेश दिए थे, जिससे.
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विद्या ग्रहण से पूर्व प्रार्थना
सरस्वती नमस्तुभ्यं वर्दे कामरूपिणीविद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। हे सबकी कामना पूर्ण करने वाली माता सरस्वती, आपको नमस्कार करता हूँ।मैं अपनी विद्या ग्रहण करना आरम्भ.
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प्रातःकाल वंदना
कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती।कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम॥ १॥समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तनमंड्ले।विष्णुपत्नि, नमस्तुभ्यं पाद्स्पर्श्म क्षमस्वे॥ २॥ भावार्थ:हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में.
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नमामिशमीशान निर्वाण रूपं।
नमामिशमीशान निर्वाण रूपं। विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।।निराकार मोंकार मूलं तुरीयं। गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं।।करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार.
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शिव पंचाक्षर स्त्रोतम
शिव पंचाक्षर स्त्रोतम अर्थार्थ “पांच अक्षर”। ये है “न”, “म”, “शि”, “वा”, “य”. नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै “न” काराय नमः शिवाय:॥मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय.
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सरस्वती स्तुति
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,वन्दे.
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या देवी सर्वभूतेषु
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ जो देवी सभी भूतो एवं प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार.
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ॐ सरस्वती नमस्तुभ्यं
ॐ सरस्वती नमस्तुभ्यं वर्दे कामरूपिणीविद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। हे सबकी कामना पूर्ण करने वाली माता सरस्वती, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।मैं अपनी विद्या ग्रहण.
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स्वस्तिवाचन मंत्र
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ भावार्थ:महान कीर्ति वाले इन्द्र हमारा कल्याण करे,.







